मैं परिश्रम पूर्वक उपार्जन करूँगा , मर्यादा पूर्वक भोग करूँगा और उदारता पूर्वक वितरण करूँगा ।
.................. स्वामी सत्येन्द्र माधुर्य .
शनिवार, २३ फरवरी २००८
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